#خراسان_۴۱
خون میچکد ز حنجرهی خستهی هرات
«حیّ علی الممات» نه! «حیّ علی الحیات»!
آن جمعه، آسمان به زمین آمد و گریست
چون دید خون دَوید به چشمان خاطرات!
جمعی هنوز گرمِ خوشی، گرمِ زندگی
ناگاه؛ خنده مُرد! نفسهای بینجات!
ها، قلب ریشریشِ خراسان دوباره ریخت
لعنت به جهل و کینه، به لبخندِ بیثبات!
دنیا، دوباره کور شد و بیصدا گُریخت
پیچید بوی مرگ در آغوش کائنات!
آری گلوله بوسهی مسمومِ زندگیست
داد از جهانِ یخزده؛ خالی از التفات!
خونِ مرا به رگرگِ این واژهها بریز
شاید که درد گُل کند از عمقِ ممکنات!
#فردوس_اعظم | #بداهه | #خراسان_۴۱
تسلیت به همزبانان دردمند
Хуросон-41
Хун мечакад зи ҳанҷараи хастаи Ҳирот
«Ҳайя ъалал-мамот» на! «Ҳайя ъалал-ҳаёт»!
Он ҷумъа, осмон ба замин омаду гирист
Чун дид хун давид ба чашмони хотирот!
Ҷамъе ҳанӯз гарми хушӣ, гарми зиндагӣ
Ногоҳ ханда мурд; нафасҳои бенаҷот!
Ҳо, қалби реш-реши Хуросон дубора рехт
Лаънат ба ҷаҳлу кина, ба лабханди бесубот!
Дунё, дубора кӯр шуду бесадо гурехт
Печид бӯи марг дар оғӯши коинот!
Оре, гулула бӯсаи масмуми зиндагист
Дод аз ҷаҳони яхзада; холӣ аз илтифот!
Хуни маро ба раг-раги ин вожаҳо бирез
Шояд ки Дард гул кунад аз умқи мумкинот!
#Фирдавс_Аъзам | #Бадоҳa | #Хуросон_41
11.04.2026
برچسب:
نویسنده: ستایش افشاری